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Brahmastra ही नहीं ये हैं पौराणिक काल के सबसे घातक हथियार

आजकल आप भी हर रोज ब्रह्मास्‍त्र (Brahmastra) का नाम जरूर सुन रहे होंगे। दरअसल ब्रह्मास्‍त्र नामक फिल्‍म (Brahmastra Movie) 9 सितंबर को सिनेमाघरों में रिलीज होने के लिए तैयार है। वहीं इस फिल्‍म के बारे में इतनी ज्‍यादा चर्चा इसलिए हो रही है क्‍योंकि सोशल मीडिया पर इसके बॉयकॉट को लेकर कई तरह के कैंपेन चलाए जा रहे हैं।

ब्रह्मास्‍त्र बॉलीवुड की अब तक की सबसे महंगी फिल्‍म भी बताई जा रही है। खैर आज हम जिस ब्रह्मास्‍त्र (Brahmastra) की बात करने वाले हैं उसका इस फिल्‍म से कोई लेना-देना नहीं है। दरअसल आपने भी रामायण और महाभारत जैसे महापुराणों और शास्‍त्रों में पौराणिक काल में प्रयोग में लाए जाने वाले अस्‍त्रों और शस्‍त्रों के बारे में जरूर पढ़ा या सुना होगा। प्राचीन भारत के अस्त्रों के बारे में विस्‍तार से जानकारी अग्नि पुराण में मिलती है।

Brahmastra

अस्‍त्र और शस्‍त्र में अंतर क्‍या है – Difference between Astra and Shastra in Hindi

प्राचीन भारत के हथियार दो प्रकार के हुआ करते थे। एक शस्‍त्र और दूसरे अस्‍त्र। इनमें शस्त्र वह थे जिन्‍हें हाथों से पकड़कर चलाया जाता था, जैसे गदा, तलवार, भाला, फरसा, हथौड़ा, कुल्हाड़ी आदि। वहीं अस्‍त्र वह होते थे जिन्‍हें मंत्रों के उच्‍चारण के जरिए चलाया जाता था।

आइये जानते हैं कि पौराणिक काल में सबसे ज्यादा शक्तिशाली अस्त्र कौन-कौन से थे?

ब्रह्मास्त्र क्‍या है – What is Brahmastra

ब्रह्मास्त्र (Brahmastra) ब्रह्मा द्वारा निर्मित एक अत्यन्त शक्तिशाली और संहारक अस्त्र है। यह दिव्यास्त्र परमपिता ब्रह्मा का सबसे मुख्य अस्त्र माना जाता है। इसका उल्लेख संस्कृत ग्रन्थों में कई स्थानों पर मिलता है। इसी के समान दो और अस्त्र हैं- ब्रह्मशिरास्त्र और ब्रह्मांडास्त्र। ये अस्त्र और भी अधिक शक्तिशाली होते हैं। वर्तमान परिद्रश्य में यदि हम इसे आज के परमाणु बम से तुलना करें तो यह उसी तरह घातक होते हैं। एक बार ब्रह्मास्त्र (Brahmastra) के चलने पर विपक्षी प्रतिद्वन्दी के साथ-साथ विश्व के बहुत बड़े भाग का विनाश किया जा सकता था।

आने वाले कई वर्षों तक उस जगह पर कोई भी जीव या मानव वहां जीवन नहीं प्राप्त कर सकते थे। ठीक वैसा ही जैसा आजकल हम परमाणु बम से हुए हमलों के बाद वहां हुए दुष्प्रभावों को देखते हैं। एक बार छोड़े जाने के बाद इसको वापस लेने का भी प्रावधान था, तभी इसके दुष्प्रभाव को रोका जा सकता था। यदि दो ब्रह्मास्त्र आपस में टकरा जायें तो सम्पूर्ण पृथ्वी का विनाश संभव था। रामायण काल में लक्ष्मण जी, मेघनाद तथा महाभारत काल में अर्जुन, अस्वत्थामा आदि के पास इस अस्त्र के होने के उल्लेख मिलते हैं।

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नारायणास्त्र – What is Narayanastra

नारायणास्त्र भगवान विष्णु का अस्‍त्र है जिसका उन्होंने अपने नारायण अवतार में उपयोग किया था। ये सतुयुग का अस्त्र माना जाता है। ये अस्‍त्र लम्बे काल तक अनेकों प्रकार के अलग-अलग शस्‍त्रों जैसे गदा, भाला, तलवारों, त्रिशूल आदि के साथ-साथ अग्नि की वर्षा करता था। जब भी कोई योद्धा इसका विरोध करता, तो इस अस्‍त्र का तेज और भी ज्‍यादा बढ़ जाता था। इस अस्त्र की शक्ति तब तक बढ़ती रहती जब तक वो योद्धा या तो शरणागति‍ ना ले ले, या फिर उसकी मृत्यु ना हो जाये।

नारायणास्त्र के सामने से जिन्दा बचने का सिर्फ एक ही उपाय था वो ये की… इसके सामने आत्मसमर्पण कर दिया जाए। युद्ध के नियमों के अनुसार, निहत्‍थे पर वार नही किया जा सकता था और इसी कारण ऐसा करने से ये अस्‍त्र शांत हो जाता था। इसकी एक और विशेषता यह थी कि इसका प्रयोग सिर्फ एक बार ही किया जा सकता था, दूसरी बार इसका प्रयोग करने पर यह प्रयोग करने वाले को ही ख़त्म कर देता था। महाभारत काल में अश्वत्थामा के पास इस अस्त्र के होने के उल्लेख मिलते हैं।

पाशुपतास्त्र – What is Pashupatastra

पुराणों में पाशुपतास्त्र नामक एक अस्त्र का भी उल्लेख मिलता है जो अत्यन्त विध्वंसक था। यह अस्त्र भगवान शिव, माँ काली और आदि पराशक्ति का हथियार माना जाता है। इसे मन, आँख या शब्द के प्रयोग से छोड़ा जा सकता था। पाशुपतास्त्र सम्पूर्ण सृष्टि का विनाश करने भर की ताकत रखता है। यह पशुपतिनाथ (भगवान शिव का एक और नाम) का अस्त्र है। उन्होंने इसे ब्रह्माण्ड की उत्‍पत्ति से पहले ही घोर तप करके आदि पराशक्ति से प्राप्त किया था।

महाभारत के युद्ध में भी पाशुपतास्त्र अस्त्र का वर्णन मिलता है। महाभारत में अर्जुन ने जयद्रथ का वध करने के लिए पाशुपतास्त्र का प्रयोग किया था। अर्जुन ने पाशुपतास्त्र अस्‍त्र को प्राप्त करने के लिए भगवान शिव की अराधना की थी।

वज्रास्त्र – What is Vajrastra

यह अस्त्र अर्जुन ने देवताओं के राजा देवराज इंद्र से प्राप्त किया था।

आग्नेयास्त्र – What is Agneyastra

आग्नेयास्त्र वह अस्‍त्र होता है जो आग निकालता है। इसको किसी भी सामान्य तरीके से शांत नहीं किया जा सकता।

वरुणास्त्र – What is Varunastra

वरुणास्त्र भारी मात्रा में पानी फेंकने वाला पौराणिक अस्‍त्र था। आमतौर पर इस हथियार का उपयोग आग्नेयास्त्र को रोकने के लिए किया जाता था। आज के दौर में इसे हम एंटी मिसाइल जैसा समझ सकते हैं।

नागास्त्र – What is Nagastra

नागास्त्र एक ऐसा अस्‍त्र होता था जो एक साथ में हजारों सांप निकालता था। इसके चलने से मौत आनी तय होती थी।

नागपाशास्त्र – What is Nagapashastra

नागपाशास्त्र ऐसा अस्‍त्र था जिसे चलाकर दुश्‍मन के हथियारों को घातक सांपों से बांध दिया जाता था। इस अस्‍त्र को किसी भी अन्‍य अस्‍त्र से खत्‍म करना संभव नहीं था। प्राचीन काल में नागपाशास्त्र को एक बायोलॉजिकल हथियार की तरह प्रयोग किया जाता था। यह अस्‍त्र एक झटके में पूरी सेना को बेहोश कर सकता था और मार भी सकता था।

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