Govardhan Puja 2022 : गोवर्धन पूजा 2022 कब है? जानिए मुहूर्त और पूजा विधि

Govardhan Puja 2022 : दीपावली का त्योहार भारत वर्ष में धूम-धाम से मनाया जाता है। यह त्योहार पाँच दिन मनाया जाता है। पहले दिन धनतेरस मनाया जाता है जहाँ भगवान धन्वन्तरि, भगवान कुबेर और माता लक्ष्मी की पूजा की जाती है। दूसरा दिन नरक चौदस के रूप में मनाया जाता है जिसको हम छोटी दिवाली भी कहते हैं। दीपावली तीसरे दिन मनाई जाती है जिसमें माँ लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा होती है।

Govardhan puja 2022

मान्यताएँ हैं कि इसी दिन प्रभु श्री राम माता सीता और अपने अनुज लक्ष्मण के साथ 14 वर्षों के वनवास के बाद अयोध्या लौट कर आए थे। इस कारण सभी लोग घरों और मंदिरों में दीपक जला कर ख़ुशियाँ मनाते है। चौथे दिन गोवर्धन पूजा मनाई जाती है। पाँचवें दिन को यम द्वितीया के रूप में मनाया जाता है। आइये जानते हैं गोवर्धन पूजा 2022 कब है? मुहूर्त और पूजा विधि (Govardhan Puja 2022)…

गोवर्धन पूजा 2022 कब है? – Govardhan Puja 2022

गोवर्धन पूजा दिनांक26 अक्टूबर 2022, बुधवार
कार्तिक शुक्ल की प्रतिपदा25 अक्टूबर 2022 शाम 04:18 से 26 अक्टूबर 2022 में रात्रि 08:48 तक
गोवर्धन पूजा शुभ मुहूर्तसुबह 06:33 से 2 बजकर 42 मिनट तक

गोवर्धन पूजा की तिथि और शुभ मुहूर्त

इस वर्ष कार्तिक शुक्ल की प्रतिपदा की तिथि 25 अक्टूबर 2022 की शाम 04:18 से शुरु होकर 26 अक्टूबर 2022 में रात्रि 08:48 तक है। गोवर्धन पूजा (Govardhan Puja 2022) करने का शुभ मुहूर्त 26 अक्टूबर 2022 को सुबह 06:33 से 2 बजकर 42 मिनट तक रहेगा।  

गोवर्धन पूजा 2022 – दीपावली का दूसरा दिन

भारत वर्ष में दीपावली के दूसरे दिन (Govardhan Puja 2022) को अलग-अलग नामों से जाना जाता है जैसे कि अन्नकूट, गोवर्धन पूजा, बलि पड़वा या बलि-प्रतिपदा, जमघट आदि । गोवर्धन पूजा या अन्नकूट सबसे महत्वपूर्ण है। बलि पड़वा या बलि- प्रतिपदा दक्षिण भारत और महाराष्ट्र में मनाया जाता है । दिवाली के दूसरे दिन लखनऊ में पतंग उत्सव मनाया जाता है। लखनऊ में इस दिन को जमघट के नाम से भी जाना जाता है।

गोवर्धन पूजा से जुड़ी पौराणिक कथा

माना जाता है कि देवराज इंद्र के अहंकार को तोड़ने के लिए भगवान श्री कृष्ण ने लीला रची। भागवत पुराण के अनुसार बृज में जब देवराज इंद्र के लिए अन्नकूट पूजा की तैयारी चल रहीं थी तब भगवान कृष्ण ने माता यशोदा से पूछा कि हम लोग इंद्र की पूजा क्यों करते है। माता यशोदा ने उत्तर दिया कि भगवान इंद्र देवों के राजा हैं। देवराज की कृपा से ही वर्षा होती है। वर्षा होने के कारण ही धरती से अन्न उगता है। अगर लोग देवराज इंद्र की पूजा नहीं करेंगे तो वो कुपित होकर धरती पर प्रलय मचा देंगे।

इस पर भगवान श्री कृष्ण का कहना था कि केवल वर्षा के लिए इंद्र की पूजा क्यों करें, क्योंकि इंद्र का कर्तव्य है कि वो धरती पर वर्षा करें। पूजा ना करने पर अगर वो कुपित हो जाते है तो उनकी पूजा नहीं करनी चाहिए। भगवान कृष्ण की लीला से सभी बृज वासी इस बात को मान गए। भगवान कृष्ण ने कहा कि हमें गौ माता की पूजा करनी चाहिए। साथ ही गौ माता को चारा देने वाले गोवर्धन पर्वत की पूजा करनी चाहिए।

इंद्र अपनी पूजा ना होता देखकर कुपित हो गए और वृन्दावन पर मुसलाधार वर्षा करवा दी। भीषण वर्षा को देख सभी लोग घबरा कर कृष्ण भगवान को कहने लगे कि हमें इंद्र की पूजा ही करनी चाहिए थी। भगवान कृष्ण ने गोवर्धन पर्वत को अपनी कनिष्ठा उँगली पर उठा लिया और सभी बृजवासियों की रक्षा की। 7 दिन तक इंद्र ने मुसलाधार वर्षा करके प्रकोप मचाया। इंद्र का अभिमान टूट गया और इंद्र ने भगवान कृष्ण से क्षमा माँगी। उसी दिन से सब लोग गोवर्धन पूजा या अन्नकूट मनाते हैं।

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गोवर्धन पूजा की विधी

गोवर्धन पूजा (Govardhan Puja 2022) को देश भर में विभिन्न प्रकार से मनाया जाता है। कई स्थानों में फलों तथा भिन-भिन प्रकार के पकवानों की मदद से छोटा सा पहाड़ बना कर कृष्ण भगवान को अर्पण किया जाता है तो कई स्थानों में अन्नकूट की सब्ज़ी या छप्पन भोग भी चढ़ाया जाता है। उत्तर भारत में गोबर का पहाड़ बना कर पूजा होती है। इस पूजा में सुबह प्रात: जग कर स्नान कर के गाय के गोबर से गोवर्धन की प्रतिमा बनाई जाती है। इसमें कटोरी के आकार की जगह की जाती है, जहाँ पर दीपक रखा जाता है।

बलि पड़वा या बलि-प्रतिपदा

गोवर्धन पूजा (Govardhan Puja 2022) के दिन बलि पड़वा या बलि-प्रतिपदा महाराष्ट्र में मनाया जाता है। इस पर्व की कहानी भगवान विष्णु के वामन अवतार से जुड़ी हुई है। मान्यता है कि जब महाराज बलि ने दैत्य गुरु शुक्राचार्य के कहने पर एक सौ यज्ञ पूरे कर लिए तब देवता सहायता माँगने भगवान विष्णु के पास गए। भगवान विष्णु ने तब वामन अवतार लिया और राजा बलि से तीन पग भूमि की माँग की। बलि भगवान विष्णु के छोटे रुप को पहचान नहीं पाए और तीन पग भूमि देने का वचन दे दिया।

उस समय भगवान विष्णु ने विराट रुप ले कर दो पग में ही धरती और आकाश के साथ पूरा संसार नाप दिया और बलि से तीसरा पग रखने का स्थान माँगा। बलि ने भगवान से अपने सिर पर अपना पग रखने को कहा। विष्णु भगवान बलि के सिर पर अपना पग रख दिया । जिसके बाद वो बलि को पाताल में लेकर चले गए । बलि ने अपना वचन निभाया इस बात से प्रसन्न होकर श्री हरि विष्णु ने उनको पाताल लोक का राजा बना दिया। बलि पड़वा पर राजा बलि की प्रतिमा बनाई जाती है तथा उनकी प्रतिमा पर फल-फूल चढ़ाकर पूजा भी की जाती है।

जमघट 2022

दिवाली के दूसरे दिन (Govardhan Puja 2022) लखनऊ में पतंग उत्सव मनाया जाता है। इस दिन पतंगों की भारी माँग रहती है। लखनऊ में यह दिन गंगा-जमुना तहज़ीब के रूप में भी देखा जाता है। पतंग के अलावा चरखी, सद्दी, मांझा को भी लोग जम के ख़रीदते है। यह सब सामान पुराने लखनऊ के इलाक़ों जैसे हुसैनगंज, चौपटिया, बताशे वाली गली, चौक, डालीगंज में मिल जाता है।

जमघट वाले दिन लखनऊ को झूले लाल पार्क, ‘फन मॉल’ के पीछे वाले पार्क में, फैजुल्लागंज, तेली बाघ और राजाजीपुरम के कई जगह में जमकर पतंग बाज़ी होती है। लखनऊ में कई जगह पतंग के टूर्नामेंट भी होते है।

अन्य रीति-रिवाज़

गोवर्धन पूजा (Govardhan Puja 2022) के दिन गाय की पूजा करने का अलग से महत्व है। सुबह उठकर अपनी गाय को स्नान करवा के उसका श्रृंगार करते है। श्रृंगार सभी लोग अपनी श्रद्धा भावना से करते है। कुछ लोग गाय के माथे पर हल्दी-कुमकुम लगाते है तो कई लोग गाय के सिंघ पर घी और गुड का लेप। गाय को तरह-तरह के वस्त्रों से तैयार करने के बाद उसकी पूजा की जाती है। पूजा के बाद गाय को गुड खिलाया जाता है। लोगों की आस्था है कि इस पूजन से माँ लक्ष्मी प्रसन्न होंगी और पूरे वर्ष उनका घर में वास रहेगा।  

गोवर्धन पूजा कब है?

26 अक्टूबर 2022

गोवर्धन पूजा का शुभ मुहूर्त क्या है?

सुबह 06:33 से 2 बजकर 42 मिनट तक

गोवर्धन पूजा को किस-किस नाम से जाना जाता है?

अन्नकूट, गोवर्धन पूजा, बलि पड़वा या बलि-प्रतिपदा, जमघट

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